अपशिष्ट का प्रबंधन ( Waste Management )
अपशिष्ट का प्रबंधन -
( Waste Management )-
अपशिष्टों के स्रोतों के आधार पर अपशिष्ट दो प्रकार के होते हैं- घरेलू अपशिष्ट (Household waste ) और औद्योगिक अपशिष्ट(industrial waste)|
इन दोनों प्रकार के अपशिष्टों के प्रबंधन के लिए अलग-अलग विधियों का प्रयोग किया जाता है|
घरेलू अपशिष्ट का प्रबंधन -
(Management of household waste )-
घरेलू अपशिष्ट के प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रथम पद यह है कि घरेलू अपशिष्टों के लिए दो प्रकार के कूड़ेदानों का प्रयोग किया जाए |इनमें से एक में ऐसी अपशिष्ट डालने चाहिए जिसका पुनर्चक्रण हो सकता है (जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट) तथा दूसरे में वे अपशिष्ट डालने चाहिए जिनका पुनर्चक्रण नहीं हो सकता है (जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट)| इनमें से पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट को कबाड़ी वाले को बेचा जा सकता है |जबकि जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट को सामुदायिक कूड़ेदान में डालना चाहिए| जहां से नगर पालिका के कर्मचारी इन्हें इनके निस्तारण स्थान पर ले जाते हैं| यदि इन अपशिष्टों में अभी भी जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट होता है तो यहां इनका पृथक्करण किया जाता है| जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट को कंपोस्ट खाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है| इसका प्रयोग निचले क्षेत्रों को भरने के लिए भी किया जाता है| यहां से भी जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट जैसे- प्लास्टिक, कांच, धातु, छीलन आदि को पुनः चक्रण के लिए भेज दिया जाता है|
वाहित मल का भी विभिन्न चरणों में उपचार किया जाता है| उसके विभिन्न ठोस अवयवों को पृथक कर लिया जाता है तथा अपशिष्ट जल का निस्यंदन तथा विजरमीकरण (क्लोरीन द्वारा) किया जाता है| यदि अपशिष्ट को कूड़ेदान में इकट्ठा नहीं करते हैं तो वह नालियों में चला जाता है| इसमें से कुछ मवेशियों द्वारा खा लिया जाता है| जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट जैसे- पॉलिथीन की थैलियां, धातु, छीलन आदि नालियों को अवरुद्ध कर देते हैं| जिससे असुविधा होती है| पॉलिथीन की थैलियां यदि मवेशियों द्वारा निगल ली जाए तो उनकी मृत्यु का कारण भी बन सकती हैं|
औद्योगिक अपशिष्ट का प्रबंधन -
(Management of industrial waste )-
औद्योगिक ठोस अपशिष्ट को भी जैव निम्नीकरणीय तथा जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट में वर्गीकृत किया जा सकता है| जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट सूत की मिलो, कागज की मिलो, वस्त्र उद्योग आदि द्वारा उत्पन्न होते हैं|
अनेक उद्योग जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट भी उत्पन्न करते हैं| उसमें शक्ति संयंत्र द्वारा उत्पन्न फ्लाई ऐश तथा लोहा एवं स्टील संयंत्र द्वारा उत्पन्न वात्या भट्टी धातु मल तथा स्टील प्रगलन धातु मल जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट होते हैं| इसी प्रकार उर्वरक उद्योग द्वारा उत्पन्न जिप्सम तथा एलुमिनियम, जिंक और कॉपर के उत्पादन उद्योग द्वारा उत्पन्न पंक तथा पछोड़न भी जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट हैं| धातु रसायन, दवा, फार्मेसी, रंजक आदि से संबंधित उद्योग ज्वलनशील तथा अधिक क्रियाशील जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं| औद्योगिक ठोस अपशिष्टों का ठीक प्रकार से निस्तारण अत्यंत अनिवार्य है| इसके लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है-
(1) पुनर्चक्रण (Re- cycling )-
उद्योगों से प्राप्त अपशिष्टों जैसे- पॉलिथीन (थैलियां), कागज (पुस्तकें, मैगजीन, अखबार आदि), कांच (कांच की बोतलें, कांच के टुकड़े आदि( का पुनर्चक्रण किया जा सकता है|
(2) भू भराव (Land filling )-
इसमें ठोस पदार्थों को निचले क्षेत्रों में डालकर उन्हें बुलडोजर से दबा देते हैं| अंत में उस पर मृदा डालकर सतह को समान कर देते हैं|
(3) दहन (Burning )-
कुछ ठोस अपशिष्टों जैसे सूखी पत्तियों आदि को खुले में जलाया जाता है|
(4) भस्मीकरण ( Incineration )-
इसमें ठोसों को 1273 K ताप से अधिक ताप पर जलाकर उन्हें पूर्णतः राख में परिवर्तित कर दिया जाता है| इस राख को बाद में भू भराव के लिए उपयोग किया जा सकता है|
(5) कार्बनिक अपशिष्ट को वायवीय या अवायवीय रूप से अपघटित कराकर उन्हें खाद में परिवर्तित कर लेते हैं| इस खाद का प्राकृतिक उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है|
(6) कुछ कार्बनिक अपशिष्टों का सूक्ष्मजीवों की सहायता से ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटन कराकर बायोगैस तथा खाद प्राप्त कर सकते हैं|
यदि जैव अनिम्नीकरणीय ठोस अपशिष्टों का ठीक प्रकार से निस्तारण नहीं किया जाता है तो यह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हो सकते हैं| अभिनव परिवर्तनों के फल- स्वरुप अपशिष्ट पदार्थों के विभिन्न उपयोग खोज लिए गए हैं| आजकल स्टील उद्योग से उत्पन्न फ्लाई ऐश तथा धातु मल का उपयोग सीमेंट उद्योग में किया जाता है|
.
( Waste Management )-
अपशिष्टों के स्रोतों के आधार पर अपशिष्ट दो प्रकार के होते हैं- घरेलू अपशिष्ट (Household waste ) और औद्योगिक अपशिष्ट(industrial waste)|
इन दोनों प्रकार के अपशिष्टों के प्रबंधन के लिए अलग-अलग विधियों का प्रयोग किया जाता है|
घरेलू अपशिष्ट का प्रबंधन -
(Management of household waste )-
घरेलू अपशिष्ट के प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रथम पद यह है कि घरेलू अपशिष्टों के लिए दो प्रकार के कूड़ेदानों का प्रयोग किया जाए |इनमें से एक में ऐसी अपशिष्ट डालने चाहिए जिसका पुनर्चक्रण हो सकता है (जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट) तथा दूसरे में वे अपशिष्ट डालने चाहिए जिनका पुनर्चक्रण नहीं हो सकता है (जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट)| इनमें से पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट को कबाड़ी वाले को बेचा जा सकता है |जबकि जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट को सामुदायिक कूड़ेदान में डालना चाहिए| जहां से नगर पालिका के कर्मचारी इन्हें इनके निस्तारण स्थान पर ले जाते हैं| यदि इन अपशिष्टों में अभी भी जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट होता है तो यहां इनका पृथक्करण किया जाता है| जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट को कंपोस्ट खाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है| इसका प्रयोग निचले क्षेत्रों को भरने के लिए भी किया जाता है| यहां से भी जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट जैसे- प्लास्टिक, कांच, धातु, छीलन आदि को पुनः चक्रण के लिए भेज दिया जाता है|
वाहित मल का भी विभिन्न चरणों में उपचार किया जाता है| उसके विभिन्न ठोस अवयवों को पृथक कर लिया जाता है तथा अपशिष्ट जल का निस्यंदन तथा विजरमीकरण (क्लोरीन द्वारा) किया जाता है| यदि अपशिष्ट को कूड़ेदान में इकट्ठा नहीं करते हैं तो वह नालियों में चला जाता है| इसमें से कुछ मवेशियों द्वारा खा लिया जाता है| जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट जैसे- पॉलिथीन की थैलियां, धातु, छीलन आदि नालियों को अवरुद्ध कर देते हैं| जिससे असुविधा होती है| पॉलिथीन की थैलियां यदि मवेशियों द्वारा निगल ली जाए तो उनकी मृत्यु का कारण भी बन सकती हैं|
औद्योगिक अपशिष्ट का प्रबंधन -
(Management of industrial waste )-
औद्योगिक ठोस अपशिष्ट को भी जैव निम्नीकरणीय तथा जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट में वर्गीकृत किया जा सकता है| जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट सूत की मिलो, कागज की मिलो, वस्त्र उद्योग आदि द्वारा उत्पन्न होते हैं|
अनेक उद्योग जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट भी उत्पन्न करते हैं| उसमें शक्ति संयंत्र द्वारा उत्पन्न फ्लाई ऐश तथा लोहा एवं स्टील संयंत्र द्वारा उत्पन्न वात्या भट्टी धातु मल तथा स्टील प्रगलन धातु मल जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट होते हैं| इसी प्रकार उर्वरक उद्योग द्वारा उत्पन्न जिप्सम तथा एलुमिनियम, जिंक और कॉपर के उत्पादन उद्योग द्वारा उत्पन्न पंक तथा पछोड़न भी जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट हैं| धातु रसायन, दवा, फार्मेसी, रंजक आदि से संबंधित उद्योग ज्वलनशील तथा अधिक क्रियाशील जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं| औद्योगिक ठोस अपशिष्टों का ठीक प्रकार से निस्तारण अत्यंत अनिवार्य है| इसके लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है-
(1) पुनर्चक्रण (Re- cycling )-
उद्योगों से प्राप्त अपशिष्टों जैसे- पॉलिथीन (थैलियां), कागज (पुस्तकें, मैगजीन, अखबार आदि), कांच (कांच की बोतलें, कांच के टुकड़े आदि( का पुनर्चक्रण किया जा सकता है|
(2) भू भराव (Land filling )-
इसमें ठोस पदार्थों को निचले क्षेत्रों में डालकर उन्हें बुलडोजर से दबा देते हैं| अंत में उस पर मृदा डालकर सतह को समान कर देते हैं|
(3) दहन (Burning )-
कुछ ठोस अपशिष्टों जैसे सूखी पत्तियों आदि को खुले में जलाया जाता है|
(4) भस्मीकरण ( Incineration )-
इसमें ठोसों को 1273 K ताप से अधिक ताप पर जलाकर उन्हें पूर्णतः राख में परिवर्तित कर दिया जाता है| इस राख को बाद में भू भराव के लिए उपयोग किया जा सकता है|
(5) कार्बनिक अपशिष्ट को वायवीय या अवायवीय रूप से अपघटित कराकर उन्हें खाद में परिवर्तित कर लेते हैं| इस खाद का प्राकृतिक उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है|
(6) कुछ कार्बनिक अपशिष्टों का सूक्ष्मजीवों की सहायता से ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटन कराकर बायोगैस तथा खाद प्राप्त कर सकते हैं|
यदि जैव अनिम्नीकरणीय ठोस अपशिष्टों का ठीक प्रकार से निस्तारण नहीं किया जाता है तो यह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हो सकते हैं| अभिनव परिवर्तनों के फल- स्वरुप अपशिष्ट पदार्थों के विभिन्न उपयोग खोज लिए गए हैं| आजकल स्टील उद्योग से उत्पन्न फ्लाई ऐश तथा धातु मल का उपयोग सीमेंट उद्योग में किया जाता है|
.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें