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अपशिष्ट क्या होता है ?

          अपशिष्ट क्या होता है ? मनुष्य एवं अन्य जीवों के दैनिक क्रियाकलापों के फल-स्वरुप निकलने वाले अनुपयोगी पदार्थ अपशिष्ट पदार्थ कहलाते हैं| इस प्रकार अपशिष्ट वे पदार्थ एवं वस्तु होते हैं जिनकी हमें आवश्यकता नहीं होती तथा जिनको हम फेंक देते हैं| साधारण बोलचाल की भाषा में हम इसे कचरा कहते हैं| घर, ऑफिस, कारखानों, अस्पतालों, यातायात के साधनों, खेत खलिहान ओ परमाणु केंद्रों से तरह-तरह के अपशिष्ट पदार्थ निकलते रहते हैं| यह पदार्थ ठोस, द्रव और गैस तीनों रूपों में हो सकते हैं| इन अपशिष्ट पदार्थों को प्रायः भूमि, जल- स्रोतों या वायु में विसर्जित कर दिया जाता है जिससे हमारा पर्यावरण दूषित होता है| कचरे के प्रकार - विभिन्न स्थानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को हम तीन भागों में बांट सकते हैं- (1) ठोस अपशिष्ट  (2) द्रव अपशिष्ट  (3) गैसीय अपशिष्ट  (1) ठोस अपशिष्ट - सब्जी एवं फलों के छिलके, टूटे-फूटे बर्तन, कांच, प्लास्टिक एवं लोहे के अनुपयोगी सामान, घर एवं कारखानों से निकली राख, खेत- खलिहान से निकलने वाले विभिन्न फसलों के डंठल, एवं भूसी आदि ठोस अपशिष...

कृषि में कीटनाशक और खर पतवार नाशक दवाओं के हानिकारक प्रभाव

कृषि में कीटनाशक और खर पतवार नाशक दवाओं के हानिकारक प्रभाव- कीटनाशक वह दवाएं होती हैं जिसका प्रयोग कृषि कार्य में फसलों को हानि पहुंचाने वाले कीटों को मारने के लिए किया जाता है, जबकि खरपतवार नाशक दवाएं वह  रसायन होता है जिसका प्रयोग कृषि कार्य मेंफसलों के बीच में  उगे हुए अनावश्यक खरपतवारों को नष्ट करने में किया जाता है|           आज  की आधुनिक कृषि पद्धति में हम तमाम वैज्ञानिक उपकरणों और हानिकारक रसायनों का प्रयोग बहुत ही अधिक मात्रा में करते चले जा रहे हैं| परंतु इन हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल करने से हमारे वातावरण, सभी जानवरों, पेड़ पौधों और मनुष्यों के स्वास्थ्य पर बहुत ही हानिकारक प्रभाव पड़ रहा है|          इन हानिकारक रसायनों के प्रभाव से मृदा प्रदूषण के साथ-साथ जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण भी होता है| जिससे मनुष्य और वनस्पतियों और जंतुओं के स्वास्थ्य पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है|

अपशिष्ट का प्रबंधन ( Waste Management )

अपशिष्ट का प्रबंधन - ( Waste Management )- अपशिष्टों के स्रोतों के आधार पर अपशिष्ट दो प्रकार के होते हैं- घरेलू अपशिष्ट (Household waste ) और औद्योगिक अपशिष्ट(industrial waste)|            इन दोनों प्रकार के अपशिष्टों  के प्रबंधन के लिए अलग-अलग विधियों का प्रयोग किया जाता है| घरेलू अपशिष्ट का प्रबंधन - (Management of household waste )- घरेलू अपशिष्ट के प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रथम पद यह है कि घरेलू अपशिष्टों  के लिए दो प्रकार के कूड़ेदानों  का प्रयोग किया जाए |इनमें से एक में ऐसी अपशिष्ट डालने चाहिए जिसका पुनर्चक्रण हो सकता है (जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट) तथा दूसरे में वे अपशिष्ट डालने चाहिए जिनका पुनर्चक्रण नहीं हो सकता है (जैव  निम्नीकरणीय अपशिष्ट)| इनमें से पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट को कबाड़ी वाले को बेचा जा सकता है |जबकि जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट को सामुदायिक कूड़ेदान में डालना चाहिए| जहां से नगर पालिका के कर्मचारी इन्हें इनके निस्तारण स्थान पर ले जाते हैं| यदि इन अपशिष्टों  में अभी भी जैव  अनिम्नीकरणीय अपशिष्...

ओजोन परत का अपक्षय(Depletion of Ozone layer )

  ओजोन परत का अपक्षय ( Depletion of Ozone layer ) - हमारे वायुमंडल में उपस्थित महत्वपूर्ण ओजोन परत का हानिकारक गैसों के द्वारा अपक्षय होने की प्रक्रिया ओजोन परत का अपक्षय कहलाता है|          ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है परंतु हाल ही में इस सुरक्षा परत के अपक्षय की सूचनाएं हैं| इसका प्रमुख कारण मानव द्वारा वायुमंडल में लगातार ओजोन विघटनकारी पदार्थों (ODS) का छोड़ना है| नाइट्रिक ऑक्साइड तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बन प्रमुख ओजोन विघटनकारी पदार्थ हैं|              पृथ्वी की सतह पर मनुष्यों की विभिन्न क्रियाओं जैसे जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक प्रयोग आदि तथा प्राकृतिक स्रोतों से NO निरमुक्त होती है| साथ ही सुपर सोनिक प्लेन समताप मंडल में अत्यधिक मात्रा में NO निरमुक्त करते हैं | NO ओजोन को डाईऑक्सीजन में बदल देते हैं|    NO  + O3 -----> NO2 + O2 उत्पन्न NO2 ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके दोबारा NO बनाती है -   NO2 + O -----> NO + O2 इस प्रकार ओजोन का अपक्षय होता रहता है और NO  भी पु...

अम्ल वर्षा (Acid Rain )

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              अम्ल वर्षा (Acid Rain ) विभिन्न औद्योगिक संस्थानों, स्वचालित वाहनों एवं घरों में ईंधनों  जैसे- लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद आदि के दहन से सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड उत्पन्न होते हैं |यह ऑक्साइड प्राकृतिक रूप से ज्वालामुखी के फटने आदि से भी उत्पन्न होते हैं| इस प्रकार यह ऑक्साइड निरंतर वायुमंडल में मिलते रहते हैं| वायुमंडल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड, सल्फर ट्राई ऑक्साइड में ऑक्सीकृत  होने के बाद जलवाष्प से अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं|       2SO2 + O2 ------> 2SO3        SO3 + H2O ----> H2SO4  ठीक इसी प्रकार नाइट्रोजन के ऑक्साइड विभिन्न अभिक्रियाओं के द्वारा N2O5  बनाते हैं जो जलवाष्प  से अभिक्रिया करके नाइट्रिक अम्ल बनाता है|      NO + O3 ------> NO2 + O2     NO2 + O3 -----> NO3 + O2    NO3 + NO2 -----> N2O5   N2O5 + H2O ------> 2 HNO3 इस प्रकार विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं के द्वारा उत्प...

पॉलिथीन का प्रयोग कितना घातक ?

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    पॉलिथीन का प्रयोग कितना घातक ? पॉलिथीन क्या है ? पॉलिथीन एक प्रकार का बहुलक(polymer) है , जिसे ऐथीन (ethene ) के बहुलीकरण (polymerisation ) की प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है |                              बहुलीकरण  n CH2=CH2 --------------------------->      (Ethene )                -----(CH2-CH2-)n-----                    (Polythene ) पॉलिथीन का उपयोग - पॉलीथीन आज के समय में हम मनुष्यों के लिए इतना महत्वपूर्ण वस्तु बन गया है कि जिसके बिना हमारा शायद कोई भी कार्य होना सम्भव नहीं दिखता है |         आज के समय में हम पॉलीथीन का उपयोग किसी वस्तु को बाजार से लाने से लेकर अन्य कई कार्यों में इसका प्रयोग करते हैं | हम आज के समय में पॉलीथीन पर बहुत ही ज्यादा निर्भर हो चुके हैं | पॉलिथीन हमारे लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक ? हम आज के समय में पॉलीथीन पर इत...

ग्लोबल वार्मिंग ( हरित गृह प्रभाव )(Global warming or green house effect )

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Global warming (Green house effect ) वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) या ग्रीन हाउस प्रभाव        ( हरित गृह प्रभाव ) हमारे वायुमंडल में उपस्थित ट्रोपोस्फीयर में लगभग 21% ऑक्सीजन, 78% नाइट्रोजन, जलीय वाष्प, CO2 व अन्य गैसें होती हैं | अंतरिक्ष से आने वाली सौर ऊर्जा की इंफ्रारेड तरंगों का जब पृथ्वी की सतह से परावर्तन होता  हैं तो जलीय वाष्प व CO2 गैसें इंफ्रारेड तरंगों को अंतरिक्ष में जाने नहीं देतीं अर्थात पृथ्वी पर पहुँचने वाली ऊष्मा पृथ्वी की सतह पर ताप बढाती है | इस प्रक्रिया को ग्रीन हाउस प्रभाव या वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग )कहते हैं |         CO2 ट्रोपोस्फीयर में होती है | सामान्य अवस्था में CO2 की सामान्य सांद्रता पर पृथ्वी का ताप तथा ऊर्जा का संतुलन बना रहता है परन्तु CO2 की अधिक सांद्रता पृथ्वी से लौटने वाली ऊष्मा को रोकती है जिससे पृथ्वी का ताप बढ़ने लगता है | इसे ही ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं |            CO2 की मोटी परत ग्रीन हाउस के शीशे की तरह कार्य करती है |यह सूर्य के प्रकाश को आर - पार...