ग्लोबल वार्मिंग ( हरित गृह प्रभाव )(Global warming or green house effect )

Global warming (Green house effect )
वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) या ग्रीन हाउस प्रभाव        ( हरित गृह प्रभाव )


हमारे वायुमंडल में उपस्थित ट्रोपोस्फीयर में लगभग 21% ऑक्सीजन, 78% नाइट्रोजन, जलीय वाष्प, CO2 व अन्य गैसें होती हैं | अंतरिक्ष से आने वाली सौर ऊर्जा की इंफ्रारेड तरंगों का जब पृथ्वी की सतह से परावर्तन होता  हैं तो जलीय वाष्प व CO2 गैसें इंफ्रारेड तरंगों को अंतरिक्ष में जाने नहीं देतीं अर्थात पृथ्वी पर पहुँचने वाली ऊष्मा पृथ्वी की सतह पर ताप बढाती है | इस प्रक्रिया को ग्रीन हाउस प्रभाव या वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग )कहते हैं |

        CO2 ट्रोपोस्फीयर में होती है | सामान्य अवस्था में CO2 की सामान्य सांद्रता पर पृथ्वी का ताप तथा ऊर्जा का संतुलन बना रहता है परन्तु CO2 की अधिक सांद्रता पृथ्वी से लौटने वाली ऊष्मा को रोकती है जिससे पृथ्वी का ताप बढ़ने लगता है | इसे ही ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं |
           CO2 की मोटी परत ग्रीन हाउस के शीशे की तरह कार्य करती है |यह सूर्य के प्रकाश को आर - पार होने देतीं है किन्तु ऊष्मा को बाहर विकरित होने नहीं देती |
     CO2 के अतिरिक्त मीथेन, ओज़ोन तथा जल वाष्प ऊष्मारोधी या ग्रीन हाउस गैसें कहलाती हैं |

 वैश्विक तापन का प्रभाव -

पिछले 130 वर्षों में पृथ्वी के ताप में लगभग 0.6°C की वृद्धि हुई है | अनुमान है कि सन 2050 तक यह तापमान वृद्धि 5°C बढ़ जाने की सम्भावना है | इससे विश्व की जलवायु पर अनेक प्रभाव दिखाई देते हैं | जैसे -
(1) समुद्र स्तर में वृद्धि -
(2) वनस्पति क्षेत्रों में परिवर्तन -
(3) खाद्य उत्पादन -
(4) बीमारियों के स्तर में वृद्धि -





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रदूषण ( Pollution )

पर्यावरण (Environment )