अम्ल वर्षा (Acid Rain )
अम्ल वर्षा (Acid Rain )
विभिन्न औद्योगिक संस्थानों, स्वचालित वाहनों एवं घरों में ईंधनों जैसे- लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद आदि के दहन से सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड उत्पन्न होते हैं |यह ऑक्साइड प्राकृतिक रूप से ज्वालामुखी के फटने आदि से भी उत्पन्न होते हैं| इस प्रकार यह ऑक्साइड निरंतर वायुमंडल में मिलते रहते हैं| वायुमंडल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड, सल्फर ट्राई ऑक्साइड में ऑक्सीकृत होने के बाद जलवाष्प से अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं|
2SO2 + O2 ------> 2SO3
SO3 + H2O ----> H2SO4
ठीक इसी प्रकार नाइट्रोजन के ऑक्साइड विभिन्न अभिक्रियाओं के द्वारा N2O5 बनाते हैं जो जलवाष्प से अभिक्रिया करके नाइट्रिक अम्ल बनाता है|
NO + O3 ------> NO2 + O2
NO2 + O3 -----> NO3 + O2
NO3 + NO2 -----> N2O5
N2O5 + H2O ------> 2 HNO3
इस प्रकार विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं के द्वारा उत्पन्न नाइट्रिक अम्ल तथा सल्फ्यूरिक अम्ल वर्षा के जल के साथ अम्ल वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आ जाते हैं| वह वर्षा जिसमें सल्फर के ऑक्साइड तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड की जलवायु से अभिक्रिया के फल स्वरुप बने सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल होते हैं अम्ल वर्षा कहलाती है |
इस वर्षा में अति कम मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भी होता है| सामान्य वर्षा के जल का पीएच मान 5.6 होता है |जब वर्षा के जल का पीएच मान 5.6 से कम हो जाता है तो इसे अम्ल वर्षा कहते हैं| अम्ल वर्षा में वायुमंडल से पृथ्वी सतह पर अम्ल निक्षेपित हो जाता है| अम्लीय प्रकृति के नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड वायुमंडल में ठोस कणों के साथ हवा में बह कर या तो ठोस रूप में या जल में द्रव रूप में कुहासे या हिम की भांति निक्षेपित होते हैं|
अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभाव-
(1) अम्ल वर्षा पेड़ पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को घोलकर पृथक कर देती है| इससे वह नष्ट हो जाते हैं तथा उनकी वृद्धि रुक जाती है| ऐसे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की दर भी घट जाती है |
(2) यह मनुष्य तथा पशुओं में श्वसन अवरोध उत्पन्न करती है |
(3) यह नदियों तथा झीलों के जल की अम्लीयता में वृद्धि कर देती है जिससे जलीय जीवो पर हानिकारक प्रभाव होता है| जल की अम्लीयता में वृद्धि के कारण मछलियां मर जाती हैं इससे पारितंत्र को भी नुकसान पहुंचता है|
(4) यह जल के पाइपों का संक्षारण करती है जिसके कारण आयरन, लेड, कॉपर आदि भारी धातु घुलकर पेयजल में पहुंच जाते हैं,यह धातु विषैले होते हैं|
(5) अम्ल वर्षा संगमरमर, चूना पत्थर आदि से बनी संरचनाओं भवनों, इमारतों आदि को नष्ट कर देती है |हमारे देश में आगरा में स्थित ताजमहल जैसी ऐतिहासिक इमारत अम्ल वर्षा से प्रभावित हो रही है |अम्ल वर्षा के कारण इसके पत्थर की चमक समाप्त हो गई है तथा इसमें छोटे छोटे गड्ढे बन गए हैं|
अम्ल वर्षा को कम करने के उपाय-
अम्ल वर्षा को कम करने के लिए वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड सल्फर ऑक्साइड जैसे वायु प्रदूषकों की मात्रा घटाने की आवश्यकता है |इसके लिए निम्न उपायों पर विचार किया जा सकता है-
(1) जीवाश्म ईंधनों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए| स्वचालित वाहनों का केवल आवश्यकतानुसार उपयोग करना चाहिए
(2) वाहनों के ईंधन की देखभाल समय-समय पर कराते रहना चाहिए|
(3) जहां तक संभव हो पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे बसों, ट्रेनों आदि का उपयोग करना चाहिए व्यक्तिगत वाहनों का नहीं|
(4) वाहनों में उत्प्रेरक समपरिवर्तक का प्रयोग करना चाहिए|
(5) न्यून सल्फर ईंधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए|
ताजमहल एवं अम्ल वर्षा-
आगरा शहर में स्थित ताजमहल के चारों ओर की वायु में सल्फर तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड की उच्च सांद्रता उपस्थित है |यह क्षेत्र के चारों ओर अधिक मात्रा में शक्ति संयंत्र एवं उद्योगों के कारण है |घरेलू कार्यों में ईंधन के रूप में निम्न गुणवत्ता वाला कोयला, केरोसिन तथा लकड़ी का उपयोग करने पर यह समस्या बढ़ती है जिसके फलस्वरूप अम्ल वर्षा ताजमहल के संगमरमर से क्रिया करती है| तथा संपूर्ण विश्व को आकर्षित करने वाले इस अद्भुत स्मारक को हानि पहुंचाती है |अम्ल वर्षा के कारण यह स्मारक धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रहा है तथा अपना प्राकृतिक रंग एवं आभा खोता जा रहा है |इस स्मारक को नष्ट होने से बचाने के लिए भारत सरकार ने सन 1955 में एक कार्य योजना प्रारंभ करने की घोषणा की|मथुरा तेल शोधन संयत्र में विषैली गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए पूर्व में ही उपयुक्त कदम उठा लिए हैं |इस योजना के अंतर्गत ताज ट्रेपीजियम की वायु को स्वच्छ करना है| इस क्षेत्र में आगरा,फिरोजाबाद, मथुरा तथा भरतपुर नगर सम्मिलित हैं |इसके अनुसार ट्रेपीजियम स्थित 2000 से भी अधिक उद्योग ईंधन के रूप में कोयला या तेल के स्थान पर प्राकृतिक गैस एलपीजी का ही उपयोग करेंगे |इसके लिए एक नई प्राकृतिक गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है जिसकी सहायता से 500000 घन मीटर प्राकृतिक गैस लाई जाएगी |शहरों में रहने वाले व्यक्तियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा कि दैनिक जीवन में कोयले ,केरोसिन या लकड़ी के स्थान पर एलपीजी का ही उपयोग करें |इसके अतिरिक्त ताज के आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले यातायात के साधनों में कम सल्फर युक्त डीजल का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा|
विभिन्न औद्योगिक संस्थानों, स्वचालित वाहनों एवं घरों में ईंधनों जैसे- लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद आदि के दहन से सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड उत्पन्न होते हैं |यह ऑक्साइड प्राकृतिक रूप से ज्वालामुखी के फटने आदि से भी उत्पन्न होते हैं| इस प्रकार यह ऑक्साइड निरंतर वायुमंडल में मिलते रहते हैं| वायुमंडल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड, सल्फर ट्राई ऑक्साइड में ऑक्सीकृत होने के बाद जलवाष्प से अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं|
2SO2 + O2 ------> 2SO3
SO3 + H2O ----> H2SO4
ठीक इसी प्रकार नाइट्रोजन के ऑक्साइड विभिन्न अभिक्रियाओं के द्वारा N2O5 बनाते हैं जो जलवाष्प से अभिक्रिया करके नाइट्रिक अम्ल बनाता है|
NO + O3 ------> NO2 + O2
NO2 + O3 -----> NO3 + O2
NO3 + NO2 -----> N2O5
N2O5 + H2O ------> 2 HNO3
इस प्रकार विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं के द्वारा उत्पन्न नाइट्रिक अम्ल तथा सल्फ्यूरिक अम्ल वर्षा के जल के साथ अम्ल वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आ जाते हैं| वह वर्षा जिसमें सल्फर के ऑक्साइड तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड की जलवायु से अभिक्रिया के फल स्वरुप बने सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल होते हैं अम्ल वर्षा कहलाती है |
इस वर्षा में अति कम मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भी होता है| सामान्य वर्षा के जल का पीएच मान 5.6 होता है |जब वर्षा के जल का पीएच मान 5.6 से कम हो जाता है तो इसे अम्ल वर्षा कहते हैं| अम्ल वर्षा में वायुमंडल से पृथ्वी सतह पर अम्ल निक्षेपित हो जाता है| अम्लीय प्रकृति के नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड वायुमंडल में ठोस कणों के साथ हवा में बह कर या तो ठोस रूप में या जल में द्रव रूप में कुहासे या हिम की भांति निक्षेपित होते हैं|
अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभाव-
(1) अम्ल वर्षा पेड़ पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को घोलकर पृथक कर देती है| इससे वह नष्ट हो जाते हैं तथा उनकी वृद्धि रुक जाती है| ऐसे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की दर भी घट जाती है |
(2) यह मनुष्य तथा पशुओं में श्वसन अवरोध उत्पन्न करती है |
(3) यह नदियों तथा झीलों के जल की अम्लीयता में वृद्धि कर देती है जिससे जलीय जीवो पर हानिकारक प्रभाव होता है| जल की अम्लीयता में वृद्धि के कारण मछलियां मर जाती हैं इससे पारितंत्र को भी नुकसान पहुंचता है|
(4) यह जल के पाइपों का संक्षारण करती है जिसके कारण आयरन, लेड, कॉपर आदि भारी धातु घुलकर पेयजल में पहुंच जाते हैं,यह धातु विषैले होते हैं|
(5) अम्ल वर्षा संगमरमर, चूना पत्थर आदि से बनी संरचनाओं भवनों, इमारतों आदि को नष्ट कर देती है |हमारे देश में आगरा में स्थित ताजमहल जैसी ऐतिहासिक इमारत अम्ल वर्षा से प्रभावित हो रही है |अम्ल वर्षा के कारण इसके पत्थर की चमक समाप्त हो गई है तथा इसमें छोटे छोटे गड्ढे बन गए हैं|
अम्ल वर्षा को कम करने के उपाय-
अम्ल वर्षा को कम करने के लिए वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड सल्फर ऑक्साइड जैसे वायु प्रदूषकों की मात्रा घटाने की आवश्यकता है |इसके लिए निम्न उपायों पर विचार किया जा सकता है-
(1) जीवाश्म ईंधनों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए| स्वचालित वाहनों का केवल आवश्यकतानुसार उपयोग करना चाहिए
(2) वाहनों के ईंधन की देखभाल समय-समय पर कराते रहना चाहिए|
(3) जहां तक संभव हो पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे बसों, ट्रेनों आदि का उपयोग करना चाहिए व्यक्तिगत वाहनों का नहीं|
(4) वाहनों में उत्प्रेरक समपरिवर्तक का प्रयोग करना चाहिए|
(5) न्यून सल्फर ईंधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए|
ताजमहल एवं अम्ल वर्षा-
आगरा शहर में स्थित ताजमहल के चारों ओर की वायु में सल्फर तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड की उच्च सांद्रता उपस्थित है |यह क्षेत्र के चारों ओर अधिक मात्रा में शक्ति संयंत्र एवं उद्योगों के कारण है |घरेलू कार्यों में ईंधन के रूप में निम्न गुणवत्ता वाला कोयला, केरोसिन तथा लकड़ी का उपयोग करने पर यह समस्या बढ़ती है जिसके फलस्वरूप अम्ल वर्षा ताजमहल के संगमरमर से क्रिया करती है| तथा संपूर्ण विश्व को आकर्षित करने वाले इस अद्भुत स्मारक को हानि पहुंचाती है |अम्ल वर्षा के कारण यह स्मारक धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रहा है तथा अपना प्राकृतिक रंग एवं आभा खोता जा रहा है |इस स्मारक को नष्ट होने से बचाने के लिए भारत सरकार ने सन 1955 में एक कार्य योजना प्रारंभ करने की घोषणा की|मथुरा तेल शोधन संयत्र में विषैली गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए पूर्व में ही उपयुक्त कदम उठा लिए हैं |इस योजना के अंतर्गत ताज ट्रेपीजियम की वायु को स्वच्छ करना है| इस क्षेत्र में आगरा,फिरोजाबाद, मथुरा तथा भरतपुर नगर सम्मिलित हैं |इसके अनुसार ट्रेपीजियम स्थित 2000 से भी अधिक उद्योग ईंधन के रूप में कोयला या तेल के स्थान पर प्राकृतिक गैस एलपीजी का ही उपयोग करेंगे |इसके लिए एक नई प्राकृतिक गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है जिसकी सहायता से 500000 घन मीटर प्राकृतिक गैस लाई जाएगी |शहरों में रहने वाले व्यक्तियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा कि दैनिक जीवन में कोयले ,केरोसिन या लकड़ी के स्थान पर एलपीजी का ही उपयोग करें |इसके अतिरिक्त ताज के आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले यातायात के साधनों में कम सल्फर युक्त डीजल का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा|




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